जब भी क्रिकेट में अनुशासन, धैर्य और सटीक गेंदबाजी की चर्चा होती है, तो ग्लेन मैक्ग्रा का नाम सबसे ऊपर आता है। आज ही के दिन 1970 में जन्मे इस ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ने अपनी सादगी और निरंतरता से क्रिकेट की दुनिया में अमिट छाप छोड़ी।
मैक्ग्रा उन गेंदबाजों में शामिल नहीं थे जो रफ्तार से बल्लेबाज को डराते थे। उनकी सबसे बड़ी ताकत थी — एक ही जगह पर बार-बार सटीक गेंद डालने की कला। यही वजह थी कि दुनिया के महान बल्लेबाज भी उनके सामने असहज नजर आते थे।
संघर्षों से भरी शुरुआत
मैक्ग्रा का शुरुआती टेस्ट करियर उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। पहले आठ टेस्ट मैचों में उनका औसत लगभग 43 था, जिसके कारण उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। यह किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास को तोड़ सकता था।
लेकिन मैक्ग्रा ने हार मानने के बजाय अपनी कमियों पर काम किया। उन्होंने अपनी लाइन-लेंथ, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया। 1994–95 के वेस्टइंडीज दौरे से उनके करियर की दिशा पूरी तरह बदल गई। इसके बाद वे ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी के मजबूत स्तंभ बन गए।
दिग्गज बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
ग्लेन मैक्ग्रा की गेंदबाजी का असली जादू तब दिखता था जब वे बड़े बल्लेबाजों के सामने होते थे। वे लगातार ऑफ स्टंप के बाहर गेंद डालते रहते थे, जिसे क्रिकेट में “कॉरिडोर ऑफ अनसर्टेनिटी” कहा जाता है।
आंकड़े उनकी महानता खुद बयां करते हैं। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक अथर्टन को उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 19 बार आउट किया, जो आज भी एक रिकॉर्ड है। वहीं, महान बल्लेबाज ब्रायन लारा को उन्होंने 13 बार पवेलियन भेजा, जो किसी भी अन्य गेंदबाज से कहीं ज्यादा है।
बल्लेबाजी में भी यादगार पल
हालांकि मैक्ग्रा को कमजोर बल्लेबाज माना जाता था, लेकिन उन्होंने 2004–05 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक शानदार अर्धशतक जड़कर सभी को चौंका दिया।
जैसे ही उन्होंने अपनी फिफ्टी पूरी की, पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। यह पल दिखाता है कि मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी सीमाएं तोड़ी जा सकती हैं।
रिकॉर्ड्स से भरा विदाई सफर
2007 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेते समय मैक्ग्रा अपने करियर के शिखर पर थे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 563 विकेट लेकर विदाई ली।
संन्यास से पहले उन्होंने एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया को इंग्लैंड के खिलाफ 5–0 से ऐतिहासिक जीत दिलाई। उसी साल विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा, और उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।
आज भी ग्लेन मैक्ग्रा का सफर युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो यह सिखाता है कि सटीकता, धैर्य और निरंतरता से महानता हासिल की जा सकती है।






